साढ़ेसाती और संतरे का नोट
कई दिनों से मन में ख़ुशी छाई है,क्योंकि फ़ोन में हर तरफ मेष राशि की बहार
कॉकरोच
आधी रात को रसोई में गई,तो कुछ आवाज़ें सुनी, ठिठक गई।लगा, कान दीवार को कुछ
उम्र
अब हमारी उम्र बढ़ने लगी है। परफ़्यूम, पाउडर की ख़ुशबू की जगह आयोडैक्स औ
हमारे चाँद
आज भी हमारे चाँद हो तुम, अदरक की तरह फैल गये हो, फिर भी हमारा चाँद हो तुम।
रसोई की राजनीति
माँ का मुक़ाबला कोई नहीं कर सकता, किसी भी क्षेत्र में, चाहे वो बच्चों को
