वो मोहल्ले वाली होली

मुझे आज भी याद हैं बचपन की होली के रंग।

पुरुषों की रंगदार पार्टी अलग,
महिलाओं का हुड़दंग अलग।

रंगों से भरी हँसी-ठिठोली,
पकवानों की ख़ुशबू,
प्यार का इज़हार,
रिश्तों की मनुहार —
सब होता था होली में।

गुप्ता आंटी की गुझियाँ,
गढ़वाली अम्मा के दाल के बड़े दही में डूबे,
मिश्रा आंटी के हाथ की बनी मिठाई,
जाड़ू अंकल के घर की नमकीन,
और हमारे घर के पकौड़े और ठंडाई —
सबसे निराले थे, भाई!

होली के गीत,
आलू के ढप्पे,
रंगों से भरे गुब्बारे,
छोटी-छोटी पिचकारी।

जेबों में भर रंग,
गधैयों से चलते थे हम टोला बनकर।

ऐसी थी रंगों की होली —
बचपन की यादों की होली।

होली के रंगों में बचपन ढूँढती,
-आपकी, लता मक्कड़।

Blog on maid, Hindi Blogs, Funny Jokes in Hindi, Funny Blog