September 6, 2026 Faila Raita मिठास By Lata Makkad जन्माष्टमी का दिन था।मैं तो सो गई, पर भूख जग गई।आधी रात को हर फ्लैट से पकवानों की ख़ुशबू आ रही थी।आलू, पूड़ी, खीर… सब मन ललचा रही थी।मेरा व्रत नहीं था,फिर भी मन मारकर सो गई…और मीठे सपनों में खो गई।जलेबी की टेढ़ी-मेढ़ी, रस से भरी गलियों में घूमते-घूमतेमैं रस के एक तालाब के किनारे आ गई।ठंडे-ठंडे रस में रसगुल्ले तैर रहे थे,हरे पिस्ते की कतरनों से सजे थे।तालाब के किनारे बालूशाही की रेलिंग बनी थी,गुजिया की नाव खड़ी थी,और लड्डुओं के पहाड़ थे।चमचमाते चाँदी के वर्क से सजाबर्फी का पुल बना था।ये सब देखकर साँसें चढ़ रही थीं,दिल-दिमाग़ में मिठास भर रही थी।दिल गोते खा रहा था,मन ललचा रहा था।जैसे ही मैंने रसमलाई का रस पीने को अंजुली बनाई…आँख खुल गई!अंजुली में रसमलाई की जगहशुगर की दवाई 💊 आ गई।सिरहाने बेटा मीठी मुस्कान लिए,शुगर नापने की मशीन लिए खड़ा था।मैं भी सोच में पड़ गई—“सपने तो सपने हैं,वो कहाँ अपने हैं।”जो है, वो सब भीतर है।बाहर सब मोह-माया है।आँखों का धोखा है,मीठी हवा का झोंका है।सपनों में मिठाई खाती,आपकी, लता मक्कड़। Blog on maid, Hindi Blogs, Funny Jokes in Hindi, Funny Blog