मेहमान

By Lata Makkad

मैंने मेहमान बनने की ठानी।
किसके घर जाऊँ… यही थी नादानी।

बस फ़ोन लगाया एक मित्र को और कहा,

“आ रही हूँ तेरे घर करने मनमानी।
अब तू करना अच्छे से मेज़बानी।”

मित्र बोला,

“आ जा… आ जा… बस तेरी ही थी कमी!

ससुराल वाले आए हैं।
कामवाली अपने मायके गई है।

पर हम दोनों मिलकर झटपट निपटा लेंगे सारे काम।
फिर करेंगे खूब आराम।

गप्पे लड़ाएँगे, सैर को जाएँगे।
आते-आते घर का सामान भी लेते आएँगे।

तू खाना अच्छा बनाती है, ऐसा मैंने सुना है। तू आ जा।
दोनों मिलकर बनाएँगे, मज़े से खाएँगे। पति और बच्चों के तो जलसे हो जाएँगे।

गर्मी से हाल-बेहाल हैं। तेरा-मेरा क्या…झूले पर बैठकर बतियाएँगे
बचपन की यादों में खो जाएँगे।”

दोस्त तो बस दोस्त होता है।
वो कहाँ मेहमान होता है…
वो तो बस मेज़बान होता है।

किसी दोस्त के घर से निमंत्रण का इंतज़ार करती,
आपकी, लता मक्कड़।

Blog on maid, Hindi Blogs, Funny Jokes in Hindi, Funny Blog