कई दिनों से मन में ख़ुशी छाई है,
क्योंकि फ़ोन में हर तरफ मेष राशि की बहार आई है।
कोई कहता है — धन बरसने वाला है,
तिजोरी के दरवाज़े खोल दो, सपनों के ताने बुन लो,
अब सपने होंगे साकार — घर में आएगी बड़ी सी कार।
मैं भी बहुत खुश थी, सपने बुन रही थी —
पैसा कहाँ रखूँगी, यही सोच रही थी।
राशिफल के अनुसार — पाँच नवम्बर से मुझ पर धन बरसने वाला था,
ऐसा मुझे पूरा अंदाज़ा था।
पर हकीकत कुछ और निकली —
वो धन बरसाने वाले भगवान, मेरे अपने पति ही निकले!
रोज सुबह, जब उनके कपड़े धोने को खाली करती,
तो जेब से कभी सतहत्तर, कभी अठत्तर रुपये निकलते।
कभी-कभी कुबेर ज़्यादा मेहरबान हो जाएं —
तो संतरे रंग का नोट, नीले नोट को आगोश में छिपाकर
बत्ती बना कर निकलता है।
धन तो धन है भाई — थोड़ा हो या ज़्यादा,
दिल को सुकून तो देता है!
मुझे उतनी ही खुशी मिलती है जेब से मिले पैसों से,
जितनी आपको मिलती है लॉटरी के पैसों से।
अब हर रोज़ मुझे बेसब्री से इंतज़ार होता है —
पति की जेबें टटोलने का,
और मेष राशि की भविष्यवाणी सच होने का।
पति की जेब से निकले हर नोट में अपना नसीब ढूँढती,
आपकी, लता मक्कड़।